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General Medicine | सामान्य चिकित्सा

Tuberculosis (TB) - Lakshan, Ilaj aur Bachav (Tuberculosis - Symptoms, Treatment and Prevention)

19 March 2026 Ganga Amrit Hospital 0 Comments
Tuberculosis (TB) - Lakshan, Ilaj aur Bachav (Tuberculosis - Symptoms, Treatment and Prevention)

👩‍⚕️ डॉ. अंजलि गुप्ता (गंगा अमृत हॉस्पिटल): "टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते दवा पूरे 6-9 महीने नियमित ली जाए। बीच में दवा छोड़ने से दवा-प्रतिरोधी (MDR-TB) हो जाता है, जिसका इलाज मुश्किल हो जाता है।"

📌 इस लेख में जानेंगे:
  • टीबी (क्षय रोग) क्या है और कैसे फैलता है?
  • टीबी के मुख्य लक्षण (फेफड़ों और अन्य अंगों में)
  • लैटेंट टीबी और एक्टिव टीबी में अंतर
  • टीबी की जांच कैसे होती है?
  • टीबी का इलाज (दवा, अवधि, सावधानियां)
  • MDR-TB (दवा-प्रतिरोधी टीबी) क्या है?
  • टीबी से बचाव के उपाय (BCG टीका, हाइजीन)
  • टीबी के मरीज के लिए डाइट और देखभाल

टीबी (क्षय रोग) क्या है? (What is Tuberculosis?)

टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक बैक्टीरिया से होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों (Pulmonary TB) को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों - लिम्फ नोड्स, हड्डियां, दिमाग, किडनी आदि - को भी संक्रमित कर सकता है (Extra-pulmonary TB)।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 26 लाख लोग टीबी से संक्रमित होते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

टीबी कैसे फैलता है? (How does TB spread?)

  • टीबी हवा के जरिए (Airborne) फैलता है।
  • जब एक्टिव टीबी का मरीज खांसता है, छींकता है, बात करता है या थूकता है, तो बैक्टीरिया हवा में फैल जाते हैं।
  • स्वस्थ व्यक्ति इन बैक्टीरिया को सांस के जरिए अंदर ले लेता है।
  • नोट: टीबी नहीं फैलता हाथ मिलाने, खाना साझा करने, बिस्तर या टॉयलेट सीट साझा करने से।

लैटेंट टीबी और एक्टिव टीबी में अंतर

लैटेंट टीबी (Latent TB) एक्टिव टीबी (Active TB)
बैक्टीरिया शरीर में मौजूद हैं लेकिन निष्क्रिय (dormant) हैं। बैक्टीरिया सक्रिय होकर बढ़ रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कोई लक्षण नहीं होते। लक्षण होते हैं (खांसी, बुखार, वजन कम होना आदि)।
दूसरों में नहीं फैलता। दूसरों में फैल सकता है।
टेस्ट (स्किन/ब्लड) पॉजिटिव आते हैं, छाती का एक्स-रे नॉर्मल। टेस्ट पॉजिटिव, एक्स-रे या थूक की जांच में बैक्टीरिया दिखते हैं।
इलाज की जरूरत होती है (भविष्य में एक्टिव होने से रोकने के लिए)। तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी।

टीबी के मुख्य लक्षण (Symptoms of TB)

फेफड़ों की टीबी (Pulmonary TB) के लक्षण:

  • 3 हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी: सूखी या बलगम वाली खांसी।
  • खांसी में खून आना (Hemoptysis): बलगम के साथ खून आना।
  • सीने में दर्द: खांसने या गहरी सांस लेने पर दर्द होना।
  • बुखार: हल्का बुखार, खासकर शाम के समय।
  • रात में पसीना आना (Night sweats): रात को सोते समय बहुत पसीना आना।
  • थकान और कमजोरी: लगातार थकान महसूस होना।
  • भूख न लगना और वजन कम होना: बिना कारण वजन घटना।

एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी के लक्षण (अंग के अनुसार):

  • लिम्फ नोड टीबी: गर्दन, बगल या कमर में गांठें (सूजी हुई ग्रंथियां), जो दर्द रहित होती हैं।
  • हड्डी और जोड़ों की टीबी: रीढ़ (Pott's disease), कूल्हे या घुटने में दर्द, सूजन, हड्डी कमजोर होना।
  • मेनिन्जियल टीबी (दिमाग की झिल्ली): तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, बेहोशी, दौरे।
  • एब्डॉमिनल टीबी (पेट की टीबी): पेट में दर्द, पेट फूलना, दस्त या कब्ज, पेट में गांठ।
  • जेनिटो-यूरिनरी टीबी: पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय दर्द।

टीबी की जांच कैसे होती है? (Diagnosis of TB)

  • मंटू टेस्ट (Tuberculin Skin Test): हाथ की त्वचा में थोड़ा सा टीबी प्रोटीन इंजेक्ट किया जाता है। 48-72 घंटे बाद सूजन देखी जाती है। यह बता सकता है कि व्यक्ति कभी टीबी से संक्रमित हुआ है या नहीं (लैटेंट या एक्टिव)।
  • IGRA ब्लड टेस्ट (Interferon-Gamma Release Assay): खून की जांच से टीबी संक्रमण का पता लगाना।
  • छाती का एक्स-रे (Chest X-ray): फेफड़ों में टीबी के घाव (lesions) या कैविटी देखने के लिए।
  • थूक की जांच (Sputum Test): सुबह के थूक (बलगम) के सैंपल की जांच माइक्रोस्कोप से करके टीबी बैक्टीरिया देखे जाते हैं।
  • CBNAAT / GeneXpert: यह मशीन 2 घंटे में पता लगा देती है कि टीबी है या नहीं और साथ ही रिफैम्पिसिन (मुख्य दवा) के प्रति प्रतिरोध है या नहीं। यह सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
  • कल्चर (Culture): थूक को लैब में उगाकर बैक्टीरिया की पुष्टि, इसमें 4-6 हफ्ते लगते हैं।
  • अन्य अंगों के लिए: अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, बायोप्सी (गांठ की सुई से जांच)।

टीबी का इलाज (Treatment of TB)

टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। भारत में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत टीबी की दवाएं सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त मिलती हैं।

डॉट्स थेरेपी (DOTS - Directly Observed Treatment Short-course):

इसमें मरीज को दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता की निगरानी में दी जाती है ताकि वह नियमित रूप से दवा ले सके।

टीबी की दवाएं और अवधि:

टीबी का इलाज कम से कम 6 महीने का होता है, लेकिन गंभीर या दवा-प्रतिरोधी टीबी में यह 9-24 महीने तक हो सकता है।

चरण समय दवाएं
गहन चरण (Intensive Phase) 2 महीने आइसोनियाजिड (H), रिफैम्पिसिन (R), पायराजिनामाइड (Z), एथामब्यूटोल (E) - चार दवाएं रोज।
निरंतरता चरण (Continuation Phase) 4 महीने आइसोनियाजिड (H), रिफैम्पिसिन (R) - दो दवाएं (या तीन)।

दवा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

  • नियमितता: दवा रोजाना बिल्कुल नियमित समय पर लें। कभी भी एक भी डोज मिस न करें।
  • पूरा कोर्स: भले ही लक्षण ठीक हो जाएं, दवा का पूरा कोर्स (6 महीने) लेना अनिवार्य है।
  • शराब: टीबी की दवा के साथ शराब बिल्कुल न पिएं, इससे लिवर खराब हो सकता है।
  • साइड इफेक्ट्स: पेशाब का रंग लाल-नारंगी होना (रिफैम्पिसिन के कारण) नॉर्मल है। लेकिन अगर त्वचा या आंखें पीली पड़ जाएं, उल्टी हो, त्वचा पर चकत्ते हों या दिखने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।
  • फॉलोअप: 2, 4, 6 महीने पर थूक की जांच दोबारा करानी होती है।

MDR-TB (दवा-प्रतिरोधी टीबी) क्या है?

जब टीबी के मरीज अनियमित दवा लेते हैं या बीच में दवा छोड़ देते हैं, तो बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) हो जाते हैं। इसे मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (MDR-TB) कहते हैं। इसमें कम से कम दो मुख्य दवाएं (आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन) काम नहीं करतीं।

MDR-TB का इलाज: यह बहुत मुश्किल और लंबा (18-24 महीने) होता है। इसमें दूसरी लाइन की दवाएं लगती हैं, जिनके साइड इफेक्ट्स ज्यादा होते हैं और इलाज महंगा भी होता है। इसलिए पहली बार में ही दवा पूरी लेना बहुत जरूरी है।

टीबी के मरीज के लिए डाइट और देखभाल

क्या खाएं?

  • प्रोटीन: दालें, अंडे, मछली, चिकन, सोया, दूध, दही - मांसपेशियों और इम्यूनिटी के लिए।
  • कैलोरी: टीबी में शरीर बहुत ज्यादा कैलोरी जलाता है, इसलिए पौष्टिक और कैलोरी युक्त आहार लें।
  • विटामिन बी कॉम्प्लेक्स: साबुत अनाज, हरी सब्जियां - दवा के साइड इफेक्ट कम करने के लिए।
  • विटामिन सी: संतरा, नींबू, आंवला - इम्यूनिटी के लिए।
  • आयरन: हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, गुड़ - खून की कमी दूर करने के लिए।
  • खूब पानी: 8-10 गिलास रोज, ताकि दवा शरीर से सही से घुले।

क्या न खाएं?

  • जंक फूड, तला-भुना, पैकेटबंद चीजें।
  • शराब (बिल्कुल न पिएं)।
  • धूम्रपान बंद करें।

देखभाल:

  • मरीज को अलग कमरे में रखें, हवादार कमरा हो।
  • मरीज के मुंह पर मास्क लगा रहे या खांसते समय रुमाल रखे।
  • थूक को बंद बर्तन में इकट्ठा करें और उसे सैनिटाइज करके फेंके।
  • इलाज शुरू होने के 2 हफ्ते बाद आमतौर पर संक्रमण फैलने का खतरा खत्म हो जाता है।

टीबी से बचाव के उपाय (Prevention of TB)

  • बीसीजी टीका (BCG Vaccine): बच्चों को जन्म के तुरंत बाद BCG का टीका लगाया जाता है, जो टीबी के गंभीर रूप (मेनिन्जाइटिस) से बचाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति से दूरी: एक्टिव टीबी के मरीज के संपर्क में आने से बचें। अगर संपर्क में आना जरूरी हो, तो N95 मास्क पहनें।
  • हवादार कमरा: टीबी के मरीज को हवादार कमरे में रखें, धूप आने दें (UV किरणें बैक्टीरिया को मारती हैं)।
  • छींक-खांसी शिष्टाचार: खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखें।
  • स्वस्थ जीवनशैली: पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम से इम्यूनिटी मजबूत रखें।
  • लैटेंट टीबी का इलाज: अगर किसी में लैटेंट टीबी पाई जाए, तो उसका इलाज करें ताकि एक्टिव न हो।

✅ टीबी से जुड़ी मुख्य बातें

  • टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है, लेकिन दवा पूरे 6-9 महीने नियमित लेना जरूरी है।
  • 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी हो तो टीबी की जांच जरूर कराएं।
  • टीबी की दवाएं सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलती हैं।
  • बीच में दवा छोड़ने से MDR-TB हो सकता है, जिसका इलाज बहुत मुश्किल है।
  • खांसते समय मास्क पहनें या मुंह ढकें, हवादार कमरे में रहें।
  • बच्चों को BCG टीका जरूर लगवाएं।

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