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Pediatrics | बाल रोग

Bachhon mein Baar-Baar Honay Wala Bukhar - Karan aur Dekhbhal

07 March 2026 Ganga Amrit Hospital 0 Comments
Bachhon mein Baar-Baar Honay Wala Bukhar - Karan aur Dekhbhal

👩‍⚕️ डॉ. प्रिया शर्मा (वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, गंगा अमृत हॉस्पिटल): "बच्चों को बार-बार बुखार आना हमेशा चिंता का विषय नहीं होता। यह उनके इम्यून सिस्टम के विकास का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर बुखार के साथ बच्चा सुस्त लगे, ठीक से खाना-पीना न कर रहा हो, या बुखार लगातार बना रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।"

📌 इस लेख में जानेंगे:
  • बच्चों में बार-बार बुखार आने के सामान्य कारण
  • कब बुखार सामान्य है और कब गंभीर?
  • घर पर बुखार की देखभाल कैसे करें
  • डॉक्टर के पास कब ले जाना चाहिए?

बच्चों में बार-बार बुखार आने के कारण (Causes of Recurrent Fever)

1. बार-बार वायरल इंफेक्शन (Recurrent Viral Infections)

छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को साल में 8-12 बार तक सामान्य वायरल इंफेक्शन (जुकाम, खांसी, बुखार) हो सकते हैं। यह उनके इम्यून सिस्टम के मजबूत होने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

2. टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis)

गले की टॉन्सिल ग्रंथियों में बार-बार इंफेक्शन होना, जिससे तेज बुखार और गले में दर्द होता है।

3. कान का इंफेक्शन (Ear Infections - Otitis Media)

छोटे बच्चों में कान का इंफेक्शन आम है, जिसके साथ तेज बुखार और चिड़चिड़ापन होता है।

4. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

पेशाब के रास्ते में इंफेक्शन भी बिना किसी अन्य लक्षण के सिर्फ बुखार का कारण बन सकता है।

5. दांत निकलना (Teething)

हालांकि दांत निकलने से हल्का बुखार (101°F तक) हो सकता है, लेकिन तेज या लंबे समय तक बुखार के लिए इसे जिम्मेदार नहीं माना जाता।

6. मौसमी बीमारियां (Seasonal Diseases)

डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया जैसी बीमारियां जो मौसम के अनुसार फैलती हैं।

घर पर बुखार की देखभाल (Home Care for Fever)

  • आराम कराएं (Rest): बच्चे को पूरा आराम करने दें। स्कूल या बाहर खेलने न भेजें।
  • भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ दें (Hydration): बच्चे को बार-बार पानी, दूध, नारियल पानी, सूप, ओआरएस का घोल पिलाते रहें। बुखार में डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है।
  • हल्का और पौष्टिक भोजन दें (Light Diet): बच्चे को खिचड़ी, दलिया, फल, सूप जैसा हल्का खाना दें।
  • गुनगुने पानी से पट्टी (Sponge Bath): अगर बुखार बहुत तेज (102°F से ऊपर) हो, तो बच्चे को गुनगुने पानी से पट्टी कराएं (स्पंज बाथ)। ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें।
  • हल्के कपड़े पहनाएं (Light Clothing): बच्चे को हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनाएं और कमरे का तापमान सामान्य रखें। गरम कपड़ों में लपेटने से बुखार और बढ़ सकता है।
  • दवा (Medication): डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न दें। जरूरत पड़ने पर पेरासिटामोल (Paracetamol) उचित मात्रा में दे सकते हैं। एस्पिरिन बच्चों को बिल्कुल न दें।
🌡️ बुखार में कब डॉक्टर को दिखाएं?
  • उम्र: 3 महीने से कम के बच्चे को बुखार (100.4°F या 38°C) हो तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
  • बुखार की तीव्रता और अवधि: 3-6 महीने के बच्चे का तापमान 101°F से ज्यादा हो, या 6 महीने से 2 साल के बच्चे का 103°F से ज्यादा हो। 3 दिन से ज्यादा बुखार रहे।
  • बच्चे की हालत: बच्चा बहुत सुस्त हो, बिल्कुल खेल नहीं रहा हो, बहुत चिड़चिड़ा हो, या बेहोशी जैसा लगे।
  • अन्य लक्षण: तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, तेज उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, शरीर पर लाल चकत्ते (Rash), या पेशाब में जलन।

✅ बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए

  • संतुलित आहार दें - हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन (दालें, अंडे)
  • टीकाकरण समय पर कराएं
  • बच्चे को पर्याप्त नींद दिलवाएं
  • खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथ धुलवाएं
  • 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान कराएं
  • बुखार के दौरान भरपूर तरल पदार्थ दें

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