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Urology | यूरोलॉजी

Prostate ki Bimari (BPH) - Lakshan aur Ilaj ke Aadhunik Tareeke (Prostate Enlargement - Symptoms and Modern Treatment)

19 March 2026 Ganga Amrit Hospital 0 Comments
Prostate ki Bimari (BPH) - Lakshan aur Ilaj ke Aadhunik Tareeke (Prostate Enlargement - Symptoms and Modern Treatment)

👨‍⚕️ डॉ. विकास शर्मा (वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट, गंगा अमृत हॉस्पिटल): "प्रोस्टेट का बढ़ना बुढ़ापे का एक आम लक्षण है, कैंसर नहीं। सही समय पर इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। आधुनिक लेजर तकनीक से सर्जरी अब पूरी तरह दर्द रहित और सुरक्षित हो गई है।"

📌 इस लेख में जानेंगे:
  • प्रोस्टेट क्या है और कहां होता है?
  • प्रोस्टेट बढ़ने (BPH) के कारण और लक्षण
  • BPH और प्रोस्टेट कैंसर में अंतर
  • जांच कैसे की जाती है?
  • दवा से इलाज के विकल्प
  • आधुनिक सर्जरी (लेजर TURP, HoLEP)
  • घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल में बदलाव

प्रोस्टेट क्या है? (What is Prostate?)

प्रोस्टेट एक छोटी, अखरोट के आकार की ग्रंथि है जो पुरुषों के मूत्राशय (Bladder) के नीचे और मूत्रमार्ग (Urethra) के चारों ओर स्थित होती है। इसका मुख्य काम वीर्य (Semen) में तरल पदार्थ बनाना है जो स्पर्म को पोषण देता है और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करता है।

प्रोस्टेट बढ़ना (BPH) क्या है?

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) एक गैर-कैंसर वाली स्थिति है जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है। यह उम्र बढ़ने के साथ बहुत आम हो जाता है। 50 साल के लगभग 50% पुरुषों और 80 साल के लगभग 90% पुरुषों में BPH के लक्षण होते हैं।

जैसे-जैसे प्रोस्टेट बढ़ता है, यह मूत्रमार्ग (Urethra) को दबाने लगता है और मूत्राशय की दीवार को मोटा कर देता है। इससे पेशाब करने में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।

BPH के कारण (Causes of BPH)

  • उम्र (Age): सबसे बड़ा कारण। 40 साल के बाद प्रोस्टेट बढ़ना शुरू होता है।
  • हार्मोनल बदलाव: उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव प्रोस्टेट के बढ़ने में योगदान कर सकते हैं।
  • पारिवारिक इतिहास: अगर पिता या भाई को BPH रहा हो तो जोखिम अधिक।
  • मोटापा: मोटापे से BPH का खतरा बढ़ता है।
  • डायबिटीज और हृदय रोग: इन बीमारियों से BPH का संबंध देखा गया है।
  • जीवनशैली: व्यायाम न करना, खराब खानपान।

BPH के लक्षण (Symptoms of BPH)

BPH के लक्षण दो तरह के होते हैं - मूत्राशय भरने से जुड़े और मूत्राशय खाली करने से जुड़े।

मूत्राशय खाली करने में समस्या (Voiding Symptoms):

  • पेशाब रुक-रुक कर आना (Intermittency): पेशाब करते समय बीच-बीच में रुक जाता है, फिर शुरू होता है।
  • पेशाब करने में जोर लगाना (Straining): पेशाब शुरू करने या खत्म करने में जोर लगाना पड़ता है।
  • पेशाब की धार कमजोर होना (Weak Stream): पेशाब का दबाव बहुत कम होता है।
  • पेशाब करने के बाद टपकना (Dribbling): पेशाब करने के बाद भी कुछ बूंदें टपकती रहती हैं।

मूत्राशय भरने से जुड़ी समस्या (Storage Symptoms):

  • बार-बार पेशाब आना (Frequency): दिन में 8 बार से ज्यादा पेशाब आना।
  • रात में बार-बार पेशाब आना (Nocturia): रात में 2 या उससे ज्यादा बार पेशाब के लिए उठना।
  • पेशाब पर कंट्रोल न रहना (Urgency): अचानक पेशाब लगना और तुरंत न रोक पाना।
🚨 तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर:
  • पेशाब बिल्कुल न आए (Urinary Retention) - यह इमरजेंसी है।
  • पेशाब में खून आए।
  • पेशाब करते समय तेज दर्द या जलन हो।
  • बुखार और ठंड लगे।

BPH और प्रोस्टेट कैंसर में अंतर

लक्षण/विशेषता BPH (सौम्य) प्रोस्टेट कैंसर
वृद्धि की गति धीरे-धीरे तेजी से
पेशाब में खून कभी-कभी अक्सर
हड्डियों में दर्द नहीं हो सकता है (फैलने पर)
वजन कम होना नहीं हो सकता है
PSA लेवल हल्का बढ़ा (4-10) बहुत ज्यादा बढ़ा (10+)

जांच कैसे की जाती है? (Diagnosis)

  • डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE): डॉक्टर उंगली से मलाशय के रास्ते प्रोस्टेट का आकार और बनावट चेक करते हैं।
  • PSA ब्लड टेस्ट: प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन नामक प्रोटीन का स्तर चेक किया जाता है। BPH में हल्का बढ़ा होता है, कैंसर में ज्यादा बढ़ा।
  • यूरिन फ्लो टेस्ट (Uroflowmetry): मशीन से पेशाब की धार की ताकत और मात्रा मापी जाती है।
  • पोस्ट-वॉयड रेसिडुअल यूरिन टेस्ट: पेशाब करने के बाद बचे हुए पेशाब की मात्रा अल्ट्रासाउंड से मापी जाती है।
  • ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड (TRUS): मलाशय में जांच डालकर प्रोस्टेट का साइज सटीक मापा जाता है।
  • यूरोडायनामिक स्टडी: मूत्राशय के दबाव और कार्यक्षमता की जांच।
  • सिस्टोस्कोपी: कैमरा युक्त पतली ट्यूब से मूत्रमार्ग और मूत्राशय के अंदर देखा जाता है।

BPH का इलाज (Treatment of BPH)

1. निगरानी (Watchful Waiting)

अगर लक्षण हल्के हैं और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित नहीं हो रही, तो सिर्फ नियमित निगरानी रखी जाती है।

2. दवा से इलाज (Medications)

  • अल्फा-ब्लॉकर्स (Alpha-Blockers): जैसे टेमसुलोसिन (Tamsulosin), सिलोडोसिन (Silodosin)। ये प्रोस्टेट और मूत्राशय की मांसपेशियों को आराम देते हैं, जिससे पेशाब आसान होता है। असर 2-3 दिन में दिखता है।
  • 5-अल्फा रिडक्टेज इनहिबिटर्स: जैसे फिनास्टेराइड (Finasteride), ड्यूटास्टेराइड (Dutasteride)। ये प्रोस्टेट के आकार को छोटा करते हैं। असर 3-6 महीने में दिखता है।
  • कॉम्बिनेशन थेरेपी: दोनों तरह की दवाएं एक साथ देना (ज्यादा असरदार)।

3. न्यूनतम आक्रामक उपचार (Minimally Invasive Treatments)

  • टीयूएनए (TUNA): रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों से प्रोस्टेट टिश्यू को गर्म करके नष्ट करना।
  • ट्रांसयूरेथ्रल माइक्रोवेव थेरेपी (TUMT): माइक्रोवेव से प्रोस्टेट टिश्यू को गर्म करके नष्ट करना।
  • यूरोलिफ्ट (UroLift): छोटे इम्प्लांट लगाकर बढ़े हुए प्रोस्टेट को किनारे खींचकर मूत्रमार्ग को खोलना।
  • एम्बोलिजेशन (PAE): प्रोस्टेट में खून की सप्लाई करने वाली धमनियों को ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे प्रोस्टेट सिकुड़ जाता है।

4. सर्जरी (Surgery)

टीयूआरपी (TURP) - ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ प्रोस्टेट

यह BPH के इलाज की सबसे पुरानी और मानक सर्जरी है। इसमें मूत्रमार्ग के रास्ते एक रिसेक्टोस्कोप डालकर प्रोस्टेट के अतिरिक्त हिस्से को काटकर निकाल दिया जाता है।

  • लाभ: बहुत असरदार, लंबे समय तक राहत।
  • नुकसान: खून बहने की संभावना, 1-2 दिन अस्पताल में रुकना, रिट्रोग्रेड इजैक्यूलेशन (वीर्य का पीछे की ओर जाना) का खतरा।

लेजर सर्जरी (Laser Surgery) - सबसे आधुनिक तरीका

  • होलेप (HoLEP) - Holmium Laser Enucleation of Prostate: लेजर से प्रोस्टेट के अतिरिक्त हिस्से को पूरा निकाल दिया जाता है। यह बहुत बड़े प्रोस्टेट के लिए भी कारगर है। खून की कमी बहुत कम, 1 दिन में छुट्टी।
  • फोटोसेलेक्टिव वेपोराइजेशन (PVP) - ग्रीनलाइट लेजर: लेजर से प्रोस्टेट टिश्यू को भाप बना दिया जाता है।
  • डायोड लेजर: दूसरे प्रकार की लेजर।

सिंपल प्रोस्टेटेक्टोमी (Simple Prostatectomy)

बहुत बड़े प्रोस्टेट (80-100 ग्राम से ज्यादा) के लिए, पेट में चीरा लगाकर प्रोस्टेट का अंदरूनी हिस्सा निकाला जाता है।

BPH के लिए घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल में बदलाव

  • पेशाब रोककर न रखें: जैसे ही पेशाब लगे, चले जाएं।
  • दो बार पेशाब करें (Double Voiding): पेशाब करने के बाद कुछ देर रुककर फिर से पेशाब करने की कोशिश करें, ताकि मूत्राशय पूरी तरह खाली हो जाए।
  • शाम के बाद तरल पदार्थ कम लें: खासकर चाय, कॉफी, शराब, कोल्ड ड्रिंक - ये पेशाब बढ़ाते हैं।
  • कैफीन और शराब से बचें: ये मूत्राशय में जलन पैदा करते हैं।
  • नियमित एक्सरसाइज करें: वजन कंट्रोल रखने से फायदा होता है।
  • पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (Kegel): पेशाब की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • संतुलित आहार: फल, सब्जियां, साबुत अनाज खाएं। जिंक से भरपूर चीजें (कद्दू के बीज) फायदेमंद।
  • ठंड से बचें: ठंड में पेशाब की समस्या बढ़ जाती है।
  • दवाओं का ध्यान रखें: कुछ दवाएं (जैसे डीकंजेस्टेंट, एंटीहिस्टामाइन) पेशाब की समस्या बढ़ा सकती हैं। डॉक्टर को बताएं।

आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे (Ayurvedic Remedies)

  • कद्दू के बीज: रोजाना मुट्ठी भर कद्दू के बीज खाएं।
  • नारियल पानी: दिन में 1-2 बार नारियल पानी पिएं।
  • गोक्षुरा (Gokshura): आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, डॉक्टर की सलाह से लें।
  • वरुण (Varun): प्रोस्टेट के लिए फायदेमंद।

✅ मुख्य बातें

  • प्रोस्टेट का बढ़ना (BPH) कैंसर नहीं है, यह बुढ़ापे की आम समस्या है।
  • बार-बार पेशाब आना, रात में उठना, कमजोर धार - ये मुख्य लक्षण हैं।
  • समय पर जांच (PSA, DRE) कराते रहें।
  • दवा से हल्के-मध्यम लक्षण कंट्रोल हो सकते हैं।
  • लेजर सर्जरी (HoLEP) आधुनिक और सुरक्षित विकल्प है।
  • लाइफस्टाइल में बदलाव (कैफीन कम, एक्सरसाइज) से भी फायदा होता है।

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