👨⚕️ डॉ. विकास शर्मा (वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट, गंगा अमृत हॉस्पिटल): "गुर्दे की पथरी एक आम समस्या है। अगर समय पर पहचान और इलाज हो जाए, तो ज्यादातर मामलों में सर्जरी के बिना भी ठीक किया जा सकता है। पानी खूब पिएं और नमक कम खाएं - यही पथरी से बचाव का सबसे आसान तरीका है।"
- किडनी स्टोन होने के मुख्य कारण
- पथरी के लक्षण और पहचान
- पथरी के आधुनिक इलाज के तरीके
- घरेलू उपाय और बचाव
किडनी स्टोन के प्रकार (Types of Kidney Stones)
- कैल्शियम स्टोन (Calcium Stones): सबसे आम (80% मामले)। कैल्शियम और ऑक्सालेट या फास्फेट से मिलकर बनता है।
- यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stones): तब बनता है जब पेशाब बहुत ज्यादा एसिडिक हो। गठिया (Gout) या ज्यादा नॉन-वेज खाने वालों में ज्यादा होता है।
- स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stones): किडनी के इंफेक्शन की वजह से बनता है और बहुत तेजी से बढ़ता है।
- सिस्टीन स्टोन (Cystine Stones): यह आनुवांशिक बीमारी की वजह से होता है और दुर्लभ है।
पथरी होने के मुख्य कारण (Main Causes)
- पानी कम पीना (Dehydration): सबसे बड़ा कारण। गर्मियों में या जो लोग कम पानी पीते हैं, उनके पेशाब में पदार्थ गाढ़े हो जाते हैं और पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
- गलत खान-पान: ज्यादा नमक, ज्यादा नॉन-वेज, ऑक्सालेट वाली चीजें (पालक, चुकंदर, चॉकलेट) ज्यादा खाना।
- मोटापा (Obesity)
- पारिवारिक इतिहास (Family History)
- कुछ बीमारियां: जैसे गठिया (Gout), बार-बार यूरिन इंफेक्शन होना।
पथरी के लक्षण (Symptoms of Kidney Stones)
जब तक पथरी छोटी होती है और किडनी में होती है, अक्सर कोई लक्षण नहीं होते। लेकिन जैसे ही वह किडनी से निकलकर यूरेटर (पेशाब की नली) में जाती है, ये लक्षण दिखने लगते हैं:
- तेज दर्द (Severe Pain): पीठ के निचले हिस्से या पसलियों के नीचे अचानक से बहुत तेज दर्द होना, जो लहरों में आता-जाता है। दर्द पेट के निचले हिस्से और कमर तक फैल सकता है। इसे रीनल कोलिक (Renal Colic) कहते हैं।
- पेशाब में जलन या दर्द: पेशाब करते समय दर्द या जलन होना।
- पेशाब में खून आना (Blood in Urine): पेशाब गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिख सकता है।
- बार-बार पेशाब आना: लेकिन बहुत कम मात्रा में पेशाब आना।
- जी मिचलाना और उल्टी (Nausea & Vomiting)
- बुखार और ठंड लगना: अगर इंफेक्शन भी हो गया हो।
पथरी का इलाज (Treatment Options)
पथरी का इलाज उसके आकार, स्थान और प्रकार पर निर्भर करता है।
1. दवा और घरेलू उपचार (Medical Expulsive Therapy)
(पथरी 5 मिमी से छोटी हो): छोटी पथरी (5 मिमी से कम) के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवा और पानी पीने की सलाह देते हैं। कुछ दवाएं जैसे टेमसुलोसिन (Tamsulosin) यूरेटर को आराम देकर पथरी निकालने में मदद करती हैं।
2. ESWL (एक्स्ट्राकोरपोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी)
(पथरी 5-20 मिमी के बीच हो): इसमें शरीर के बाहर से शॉक वेव्स डालकर पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है, जो पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं। इसमें कोई चीरा नहीं लगता और OPD में ही हो जाता है।
3. URS (यूरेटेरोस्कोपी)
(नीचे की पथरी के लिए): इसमें यूरेटर (पेशाब की नली) में एक पतला फाइबर ऑप्टिक स्कोप (Ureteroscope) डालकर पथरी को देखा जाता है। फिर लेजर से पथरी को तोड़ दिया जाता है और उसके टुकड़े निकाल लिए जाते हैं। इसे RIRS भी कहते हैं।
4. PCNL (पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी)
(बड़ी पथरी >2 सेमी या जटिल पथरी के लिए): इसमें पीठ में एक छोटा सा चीरा (लगभग 1 सेमी) लगाकर किडनी तक पहुंचा जाता है और पथरी को सीधा निकाल लिया जाता है। यह बड़ी पथरी के लिए सबसे कारगर इलाज है।
| उपचार विधि | कब किया जाता है? | अस्पताल में भर्ती |
|---|---|---|
| दवा | 5 मिमी से कम पथरी | नहीं |
| ESWL | 5-20 मिमी पथरी (ऊपरी हिस्से में) | दिन में छुट्टी |
| URS/RIRS | मध्य या निचले हिस्से की पथरी | 24-48 घंटे |
| PCNL | 2 सेमी से बड़ी पथरी, जटिल पथरी | 2-4 दिन |
पथरी से बचाव के उपाय (Prevention Tips)
- भरपूर पानी पिएं (Drink Plenty of Water): दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं ताकि पेशाब साफ और पतला रहे। नींबू पानी भी फायदेमंद है।
- नमक कम खाएं: ज्यादा नमक कैल्शियम को पेशाब में आने के लिए बढ़ावा देता है।
- कैल्शियम की मात्रा का ध्यान रखें: कैल्शियम से भरपूर चीजें (दूध, दही) संतुलित मात्रा में लें। कैल्शियम की गोलियां (Supplements) डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
- ऑक्सालेट वाली चीजें सीमित करें: पालक, चुकंदर, रबड़, चॉकलेट, मेवे सीमित मात्रा में खाएं।
- नॉन-वेज सीमित करें: ज्यादा मांस-मछली से यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
✅ पथरी से बचाव के लिए याद रखें
- दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं - यह सबसे जरूरी है
- नमक कम खाएं, ऑक्सालेट वाली चीजें सीमित करें
- नींबू पानी नियमित पिएं - साइट्रेट पथरी बनने से रोकता है
- कैल्शियम सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना न लें
- पथरी हुई है तो नियमित जांच कराते रहें
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